तुम कोई और थे
जब तुम मुझ से प्यार करते थे
तुम कोई और थे।।
कभी शब्दों से नहीं, तुम
आंखों से इज़हार करते थे
मेरी लाख बुराइयों को, तुम
नजरअंदाज कर अपनी जान देते थे
तुम कोई और थे
जब तुम मुझ से प्यार करते थे।
मेरी एक हसीं पर जो, तुम
थम के एक आंह भरते थे
तपती धूप में, तुम
मेरी छांव बनते थे
तुम कोई और थे
जब तुम मुझ से प्यार करते थे।
दिन को जब रात कहूं, तुम
भी रात कहते थे
उफ़ इश्क़ की जो, तुम
रोज़ एक मिसाल पेश करते थे
तुम कोई और थे
जब तुम मुझ से प्यार करते थे।

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